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ब्रायोफाइटा (Bryophyta) के लक्षण और आर्थिक महत्व, Economic importance of Bryophyta, Bryophyta in hindi

ब्रायोफाइटा (Bryophyta) के लक्षण और आर्थिक महत्व, Economic importance of Bryophyta,  Bryophyta in hindi

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ये पौधे नम एवं छायादार स्थानों पर उगते हैं। इन्हें वृद्धि एवं निषेचन की क्रिया के लिये पर्याप्त मात्रा में जल की आवश्यकता होती है।

1. आवास (Habitat)

ब्रायोफाइटा समूह के पौधे अधिकतर नम एवं छायादार स्थानों, पहाड़ी चट्टानों, मैदानों, वृक्षों की छाल, नदी एवं तालाबों के किनारों, पुरानी नम दीवारों आदि स्थानों पर पाये जाते हैं। वर्षा ऋतु में अधिक वृद्धि के कारण ये भूमि पर हरे रंग के स्तर का निर्माण करते हैं। ये अधिकतर स्थलज (Terrestrial) होते हैं।

2-पोषण (Nutrition)

अधिकतर ब्रायोफाइट्स में क्लोरोफिल पाया जाता है जिससे वे स्वतः अपना भोजन प्रकाश-संश्लेषण विधि द्वारा बनाते है। इस प्रकार ये आत्मपोषी (autotrophi:) होते हैं। कुछ ब्रायोफाइट्स जैसे- बक्सबौमिया एफिला तथा क्रिप्टोथैलस मिराबिलिस मृतोपजीवी होते हैं। ये अपना भोजन सडे-गले पदार्थों से प्राप्त करते हैं।

3. शारीरिक रचना (Body structure)

इनका मुख्य पौधा युग्मकोद्भिद (gametophyte) होता है।यह प्रायः हरे रंग का शूकाय (thallus) होते हैं। इनके पौधों में वास्तविक जडों (true roots) का अभाव होता है। जड़ों के स्थान पर एक बहुकोशिकीय मूलाभास (rhizoids) पाये जाते हैं जो युग्मकोभिद को भूमि पर मजबूती से खड़ा रखते हैं तथा नटून भूमि से जल एवं खनिज लवणों का अवशोषण करते हैं। मॉस (Mosses) में मूलाभास बहुकोशिकीय, शाखित एवं तिरछी पट्टीकाओं युक्त होते हैं।

शूकाय प्रायः चपटे होते है। इस समूह के पादपों में सवहन ऊतकों (vascular tissues) का पूर्ण अभाव होता है अर्थात् इनमें जाइलम एवं फ्लोएम नहीं पाये जाते हैं। मार्केन्सिएल्स क्रम के सदस्यों को छोड़कर अन्य सभी ब्रायोफाइट्स में शल्कों (Scales) का अभाव होता है।

ब्रायोफाइटा के लक्षण

1. इनका शरीर थैलोफाइटा की अपेक्षा अधिक जटिल होता है।

2. इनमें तना और पत्तियों जैसी संरचनायें पाई जाती हैं।

3. जड़ के स्थान पर मूलाभास (Rhizoids) होते हैं जो मृदा से जल व लवणों का अवशोषण करते हैं।

4. इनके शरीर में अवशोषित जल व अन्य पदार्थों के संवहन के लिएविशिष्ट ऊतक नहीं होते।

5. ब्रायोफाइट्स नम एवं छायादार स्थानों पर पाये जाते हैं। इसी कारण इन्हें पादप वर्ग का उभयचर कहा जाता है।

उदाहरण : मॉस (फ्यूनेरिया), रिक्सिया तथा मार्केन्शिया आदि।

ब्रायोफाइटा का आर्थिक महत्व (Economic importance of Bryophyta)

(1) ब्रायोफाइटा के पौधे मृदा अपरदन (soil erosion) को रोकने में सहायता करते हैं। ये सघन चटाई के रूप में मिट्टी को रोकने एवं उसे अपने स्थान पर जमाये रखने में सहायता करते हैं।

(2) इनके पौधों में जल-अवशोषण की शक्ति बहुत अधिक होती है जिसके कारण अधिक वर्षा के समय ये बाढ़ को रोकने में सहायता करते हैं।

(3) मॉसों का प्रयोग कांच की वस्तुओं एवं अन्य टूटने वाली वस्तुओं के लिए पैकिंग सामग्री के रूप में किया जाता है।

(4) स्फैगनम (Sphagnum) मॉस एक प्रकार का ईंधन उत्पन्न करते हैं जिसे पीट (peat) कहते हैं। यह दलदल वाले स्थानों पर एकत्रित होकर धीरे-धीरे अपघटित होता रहता है और बाद में इसका प्रयोग ईधन के रूप में किया जाता है।

(5) एस्किमोज (Eskimos) निवासी स्फैगनम का प्रयोग चिराग में बत्ती की जगह करते हैं।

(6) पीट मॉसों का प्रयोग शोधशालाओं में बीजों के अंकुरण करवाने में तथा बगीचों में नवीन पौधों के लिए बिस्तर (bed) तैयार करने में किया जाता है।

(7) ब्रायोफाइट के पौधों का पारिस्थितिकीय महत्व भी है। ये महत्वपूर्ण स्थल निर्माण का कार्य करते हैं। लिवरवर्ट, मॉस तथा लाइकेन ही वे प्रथम पौधे हैं जो ऐसे स्थानों पर  कि पौधों का उगना असम्भव होता है, पहले वृद्धि करके स्थल निर्माण का कार्य करते हैं। इस स्थल पर पहले घासों तथा फर्न आदि के पौधे उगते हैं तथा बाद में झाड़ियां व काष्ठकीय पौधे उगते हैं।

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