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यौगिक क्रियाएं (मुद्राएं, प्राणायाम) लाभ और तरीका- o2kipathshala

यौगिक क्रियाएं (मुद्राएं, प्राणायाम) लाभ और तरीका

 नमस्कार दोस्तों, आज के इस लेख में हम मुद्रा और प्राणायाम जैसी योगिक गतिविधियों के बारे में बात करने जा रहे हैं। इस लेख में आपको शंख मुद्रा प्राणमुद्रा शून्य मुद्रा के बारे में जानकारी मिलेगी जिसके लाभ और विधि इस लेख में आपको भ्रामरी प्राणायाम सहित प्राणायाम के बारे में जानकारी मिलेगी।

और दोस्तों आप ये सभी आसन और प्राणायाम घर बैठे कर सकते हैं। लेख आपको प्रेरणा देता है जैसे कि प्रामारी और तीन आसन। तीन आसनों में से पहला शंख मुद्रा है और दूसरा प्राण मुद्रा है और तीसरा है शून्य मुद्रा। जो आप ऊपर देख सकते हैं उसे देखते हुए और भ्रामरी प्राणायाम की एक तस्वीर भी देदी हैं।

Compound actions (mudras, pranayama) benefits and method - o2kipathshala

मुद्रा यौगिक क्रियाएं (मुद्राएं, प्राणायाम)

मानव हाथ की पांच उंगलियां प्रकृति के पांच तत्वों - अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी और जल का प्रतीक हैं। प्रत्येक उंगली एक विशेष तत्व से जुड़ी होती है। इन पांच तत्वों को इच्छानुसार उतार-चढ़ाव किया जा सकता है, स्वास्थ्य की रक्षा की जा सकती है और क्षमता प्राप्त करके रोगों को रोका जा सकता है।

1. शंख मुद्रा:

विधि : दाहिने हाथ के अंगूठे को बायें हाथ की मुट्ठी में बंद करके दाहिने हाथ की तर्जनी (पहली अंगुली) को बायें हाथ के अंगूठे से मिलाने से शंख मुद्रा बनती है। इस आसन को दाहिने हाथ की शेष तीन अंगुलियों से किया जाता है और बाएं हाथ की बंद उंगलियों पर हल्का दबाव डाला जाता है। इस तरह हाथ बदलकर या दूसरे हाथ से भी शंख मुद्रा बनाई जा सकती है।

लाभ:

• गले और थायरॉयड ग्रंथि को प्रभावित करता है।

• ध्वनि मधुर हो जाती है।

• पाचन में सुधार करता है। मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

प्राण मुद्रा:

पान मुद्रा छोटी उंगली के सामने और अनामिका (सबसे छोटी और उसके सबसे करीब) को अंगूठे के सामने से जोड़कर बनती है। शेष दो उंगलियां सीधी रहती हैं।

लाभ:

• विटामिन सी की कमी दूर होती है।

• थकान दूर होती है। आंख की रोशनी बढ़ती है।

• रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

3. शून्य मुद्रा:

तरीका :- 

• दूसरी अंगुली को अंगूठे से बीच से हथेली की ओर दबाएं। इस दौरान पहली उंगली के साथ-साथ आखिरी दो अंगुलियों को भी सीधा रखें।

लाभ::

• कान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।

• आकस्मिक गूंगापन के लिए भी फायदेमंद है।

प्राणायाम

भ्रामरी

भ्रामरी शब्द "भ्रामर" से आया है। इस प्राणायाम को करते समय खर्राटे लेने से भृंग की आवाज निकलती है।

तरीका:

• पद्मासन या सिद्धासन में बैठें।

• दोनों नथुनों से श्वास लें।

• सांस को फेफडों में रोके रखें और मम..म..म..म..म.म.म के उच्चारण के साथ धीरे-धीरे सांस छोड़ें। ऐसा करते समय दोनों हाथों की अंगुलियों को ढीला रखें और चेहरे पर हल्के से लगाएं जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। ऐसी पाँच से दस आवृत्तियाँ की जा सकती हैं।

लाभ:

• मन प्रसन्न हो जाता है।

• गले की खराश से राहत दिलाता है।

• स्वर में राग है। याददाश्त बढ़ाता है।

नमस्ते मित्रों आज का यह पोस्ट आपको कैसा लगा कॉमेंट में बता दीजिए और इसके अलावा भी आप योग के और कई आर्टिकल हमने इस वेबसाइट में लिखें तो आप कैटेगरी में जाकर उस आर्टिकल कोभी पढ़ लेना थैंक्स।

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